10 मई से शुरू हो रही चारधाम यात्रा | Chardham Yatra

महत्वपूर्ण चार धाम (केदारनाथ धाम, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) यात्रा (Chardham Yatra) को लेकर उत्तराखंड सरकार की वेबसाइट को कर दिया एक्टिवेट

 

हिन्दू धर्म में सबसे अधिक मान्यता वाली चार धाम यात्रा की शुरुआत इस साल 10 मई से शुरू होने वाली है। इन्ही में से तीन धाम केदारनाथ धाम, गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट 10 मई को खुलेंगे और वही चौथे धाम बद्रीनाथ के कपाट 2 दिन बाद 12 मई को खुल जायेंगे| इस साल होने वाली चार धाम यात्रा का रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है।

उत्तराखंड में तैयारी शुरू-

देवो की भूमि कहे जाने वाला उत्तराखंड में महत्वपूर्ण चार धाम यात्रा (Chardham Yatra)अब शुरू होने वाली है। केदारनाथ धाम, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री यात्रा की शुरुआत 10 मई से हो जाएगी। जिसके बाद चारों धाम तक तीर्थयात्री आसानी से पहुंच सकेंगे और अपनी यात्रा कर सकेंगे। इसको लेकर उत्तराखंड सरकार ने भी तैयारी शुरू कर दी है। चार धाम यात्रा के लिए बर्फ को हटाया जा रहा है |

धर्मस्थलों तक पहुंच मार्गों का निर्माण भी  किया जा रहा है। यह तक कि यात्रा को लेकर उत्तराखंड सरकार की वेबसाइट को भी एक्टिवेट कर दिया गया है जिससे तीर्थयात्री ऑनलाइन ही ग्रीन पास ले सकते हैं। इसके अलावा सरकार द्वारा ऑफलाइन पास की भी व्यवस्था की गई है क्योकि बिना पास के चार धाम यात्रा करना संभव नहीं हो सकेगा।

इस यात्रा (Chardham Yatra) के दौरान तीर्थयात्री अलग- अलग देवी- देवताओं की अराधना करते हैं। केदारनाथ धाम (12 ज्योतिर्लिंगों में से एक) पर भगवान शिव की पूजा की जाती है। वहीं, बद्रीनाथ धाम पर भगवान बदरी यानी विष्णु की पूजा होती है। गंगोत्री धाम को माँ गंगा के उद्गम और यमुनोत्री को माँ यमुना के उद्गम के तौर पर पूजा जाता है।

सनातन में है चार धाम का महत्व-

सनातन धर्म में चार धाम यात्रा का अलग ही महत्व है। यह चार धाम उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय क्षेत्र में स्थित है। हिमालय की चोटियों के बीच स्थित चारों धाम को सनातन मान्यता के अनुसार मोक्ष प्राप्ति के लिए एक बड़े कदम के रूप में माना जाता है। चार धाम की यात्रा (Chardham Yatra) से प्राणी के मन को बेहद शांति मिलती है। यही वजह है कि हर साल लाखों तीर्थयात्री चार धाम की यात्रा के लिए उत्तराखंड पहुंचते हैं। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, चार धाम की यात्रा पश्चिम से पूर्व की ओर की जाती है, जहां यमुनोत्री से शुरू होकर यह यात्रा गंगोत्री, केदारनाथ से होते हुए फिर बद्रीनाथ तक की जा सकती है।

Chardham Yatra

 

कैसे करें चार धाम यात्रा का रजिस्ट्रेशन? (Chardham Yatra Registration 2024)-

चार धाम यात्रा के लिए आप इसकी आधिकारिक वेबसाइट https://registrationandtouristcare.uk.gov.in/chardham-yatra-uttarakhand.php पर जाकर अपना या फिर अपने दोस्तों, और परिवार वालो का रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इसी रजिस्ट्रेशन के आधार पर ही आपको चार धाम की यात्रा का ग्रीन पास मिल जाएगा।

यात्रा के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन लिए 3 तरीके (Chardham Yatra Registration)-

registrationandtouristcare.uk.gov.in वेबसाइट पर जाकर अपना अकाउंट बनाना होगा। इसके बाद रजिस्ट्रेशन की प्रोसेस शुरू कर पाएंगे।

वेबसाइट के अलावा आप वॉट्सऐप नंबर 8394833833 पर रजिस्ट्रेशन करने के लिए यात्रा (Yatra) लिखकर मैसेज करके भी रजिस्टर कर सकते है।

इन सबके अलावा अपने मोबाइल में touristcsreuttrakhand एप इंस्टॉल करके भी इस ऐप के जरिये भी रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।हैं।

उत्तराखंड सरकार द्वारा देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और गुप्तकाशी जैसे स्थानों पर ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की बात भी कही जा रही है। रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट जैसे स्थानों पर ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन काउंटर मिल सकते हैं। जो भी लोग निजी वाहन से आ रहे हैं, उन्हें अपने वाहन का भी रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

कैसे करें चार धाम यात्रा (Chardham Yatra)

चार धाम की यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है। चार धाम (Chardham Yatra) यात्रियों के लिए वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, या पासपोर्ट जैसे कोई भी नागरिक कार्ड पास में रखना जरूरी है। चार धाम यात्रियों की सुविधा के लिए डीलक्स और बजट आवास की सुविधा भी आसानी से मिल जाती है। चार धाम की यात्रा आप सड़क मार्ग या फिर हवाई मार्ग हेलिकॉप्टर से कर सकते हैं।

यह यात्रा दिल्ली (Chardham Yatra Package From Delhi), हरिद्वार, ऋषिकेश या देहरादून से शुरू होती है। इसके अलावा अगर आप चलने में असमर्थ हैं तो ऐसे लोगों के लिए पालकी, घोड़ा और पिट्‌ठू की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। तीर्थयात्रियेां को जैकेट, दस्तानेद्व स्वेटर, ऊनी मोजे और रेनकोट रखना जरूरी है।

हेलीकॉप्टर से चार धाम यात्रा (Chardham Yatra by Helicopter 2024)-

हेलीकॉप्टर सेवा द्वारा 4 धाम यात्रा न केवल उन लोगों के लिए है जो समय को लेकर चिंतित रहते हैं बल्कि उनके लिए भी हैं जो व्यापक सड़क यात्रा का प्रबंधन करने में असमर्थ होते हैं। हेलीकॉप्टर आप कम समय में संपूर्ण तीर्थ यात्रा पूरी कर सकते हैं | चार धाम यात्रा हेलीकॉप्टर सेवा का शुरुआती बिंदु देहरादून में स्थित सहस्त्रधारा (Sahastradhara) हेलीपैड है। जहाँ से यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ सहित सभी चार गंतव्यों के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं सुबह 6:30 बजे संचालित की जाती हैं।

कब करें चार धाम यात्रा (Chardham Yatra)-

चार धाम की यात्रा के लिए बारिश के सीजन से पहले और बाद का समय काफी बेहतर होता है। इस वर्ष आप मई-जून और उसके बाद सितंबर-अक्टूबर में बेहतर माहौल में यात्रा कर सकते हैं। क्योकि बारिश के समय में मौसम विभाग की ओर से कभी भी खतरे का अलर्ट जारी कर दिया जाता है। उस समय यात्रा करने वालों को मौसम विभाग के अलर्ट का विशेष रूप से ख्याल रखने की जरूरत होती है क्योकि बारिश के मौसम में पहाड़ों के बीच कभी भी लैंड स्लाइडिंग हो जाती हैं।

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चार धाम (Chardham Yatra Places)

यमुनोत्री धाम-

यमुनोत्री को यमुना नदी के उद्गम स्थल माना गया है। यमुनोत्री उत्तराखंड के जिला उत्तरकाशी में गढ़वाल हिमालय में 3,293 मीटर (10,804 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। यह उत्तराखंड के चार धाम तीर्थ यात्रा (Chardham Yatra) स्थलों में से एक है। यमुनोत्री में मुख्य आकर्षण देवी यमुना के लिए समर्पित मंदिर और जानकीचट्टी (7 किमी दूर) में पवित्र तापीय झरना हैं।

देहरादून से यमुनोत्री की दूरी 182 किलोमीटर है। वहीं, हरिद्वार से यह 226 किलोमीटर दूर है। यहाँ यमुना को मृत्यु के देवता यम की बहन के रूप में मान्यता मिली है। इसलिए, यहां स्नान कर लोग शांति का अनुभव करते हैं। इस वर्ष 10 मई से यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे। यमुनोत्री मंदिर सुबह लगभग 7 बजे श्रद्धालुओं के लिए खुलता और रात 8 बजे तक यहां दर्शन होता है। बीच में दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक यहां दर्शन बंद रहता है। यहाँ यात्रा करने वाले तीर्थयात्री सूरज कुंड, शनि देव मंदिर, जानकीचट्टी, सप्तऋषि कुंड का भी दर्शन कर सकते हैं।

गंगोत्री धाम-

गंगोत्री धाम की सनातन मान्यता गंगा नदी के उद्गम स्थल के तौर पर है। यह माना जाता है कि गंगोत्री धाम में ही गंगा नदी को स्वर्ग से भगवान शिव ने अपनी जटाओं से आजाद किया था | गंगोत्री उत्तराखंड के चार धाम तीर्थयात्रा स्थलों में से एक है | नदी के स्रोत को भागीरथी कहा जाता है जिसके बाद से यह अलकनंदा में मिलती है, जहाँ से यह गंगा नाम कहलाती है | इस वर्ष गंगोत्री धाम के कपाट 10 मई को खुलेंगे।

मंदिर के गेट तीर्थयात्रियों के लिए सुबह 6:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक खुले रहते हैं। गंगोत्री पर सुबह 4:00 बजे आरती के साथ पूजा शुरू हो जाती है। शाम 7:00 बजे शयन आरती होती है। मंदिर के कपाट दोपहर 2:00 बजे से 3:00 बजे के बीच बंद रहते है। गंगोत्री धाम के साथ साथ तीर्थयात्रा के लिए आने वाले यात्री गौमुख, सूर्य कुंड, भागीरथ शिला, भैरव घाटी, और जलमग्न शिवलिंग आदि का भी दर्शन कर सकते हैं।

केदारनाथ धाम-

भगवान शिव को समर्पित केदारनाथ चार धाम (Chardham Yatra) तीर्थयात्रा का एक हिस्सा है, और भारत में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित इस स्थल को बाबा केदार (शिवजी) के धाम के रूप में मान्यता मिली हुई है। केदारनाथ धाम को प्राचीन शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। इसके निर्माण को लेकर एक मान्यता है कि द्वापर युग में पांडवों ने इसका निर्माण करने के बाद मंदिर में इस मंदिर में पूजा की थी जिसके बाद वे मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़े थे। इस प्राचीन मंदिर की वास्तुकला उत्कृष्ट है |

इस मंदिर के अंदर एक शंक्वाकार चट्टान की संरचना को भगवान शिव के रूप में पूजा जाता है। यह धाम देहरादून से 254 किलोमीटर और हरिद्वार से 125 किलोमीटर दूर है। मंदिर में पूजा अभिषेक आरती के साथ सुबह 4:00 बजे शुरू होती है और शाम 7:00 बजे शयन आरती के बाद मंदिर में दर्शन बंद हो ,जाते है। केदारनाथ धाम दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक बंद रहता है। केदारनाथ मंदिर के साथ साथ तीर्थयात्री गौरीकुंड, चंद्रशिला ट्रैक, वासुकी ताल, भैरव नाथ मंदिर, तुंगनाथ, और त्रिजुगी नारायण आदि तीर्थस्थलों का भी दर्शन कर सकते हैं।

बद्रीनाथ धाम-

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित यह धाम भगवान विष्णु को समर्पित है। सृष्टि के पालनहार के रूप में भगवान श्री हरि (विष्णु) की पूजा होती है। बद्रीनाथ धाम में आदि गुरु शंकराचार्य ने मोक्ष प्राप्त किया था। हिन्दू धर्म में मान्यता है कि इस धाम के दर्शन से पुनर्जन्म की प्रक्रिया से मुक्ति मिल जाती है। बद्रीनाथ धाम केदारनाथ से 218 किलोमीटर, देहरादून से 334 किलोमीटर और हरिद्वार से 316 किलोमीटर की दूरी पर स्तिथ है।

बद्रीनाथ धाम में पूजन सुबह 4:30 बजे शुरू होते हैं और शयन आरती के साथ रात 9:00 बजे दर्शन बंद हो जाते है। तीर्थयात्रियों के लिए मंदिर सुबह 7:00 बजे खुलता लेकिन दोपहर में 1:00 बजे से शाम 4:00 बजे के बीच यहां दर्शन बंद रहते है। तीर्थयात्री बद्रीनाथ धाम की यात्रा के बाद व्यास गुफा, गणेश गुफा, तप्त कुंड, चरण पादुका, योगध्यान बद्री मंदिर, माना गांव, भीम पुल, पांडुकेश्वर, और सतोपंथ लेक आदि का भी भ्रमण कर सकते हैं।

तीर्थयात्रियों के रुकने की सुविधा-

चार धाम यात्रा (Chardham Yatra) के दौरान ठहरने के लिए होटल, गेस्ट हाउस, रिसॉर्ट्स, आश्रम, धर्मशाला आदि मिल जाते हैं। यहाँ आने वाले यात्रियों को लग्जरी और किफायती दोनों प्रकार के होटल मिलते हैं। गढ़वाल मंडल विकास निगम की ओर से हरिद्वार, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, जोशीमठ, पीपलकोटी, देहरादून, देवप्रयाग, गोविंद घाट, बद्रीनाथ, ऋषिकेश, केदारनाथ, गुप्तकाशी, हरसिल और यमुनोत्री में सरकारी गेस्ट हाउस की भी सुविधा मिलती है।

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